Archive for February, 2010

होली की कहानियां…


होली का त्यौहार कई पौराणिक गाथाओं से जुडा हुआ है। इनमें कामदेव प्रह्लाद और पूतना की कहानियां प्रमुख है। प्रत्येक कहानी के अंत में सत्य की विजय होती है और राक्षसी प्रवृत्तियों का अंत होता है।

पहली कहानी शिव और पार्वती की है। हिमालय पुत्री पार्वती चाहती थीं कि उनका विवाह भगवान शिव से हो जाये पर शिवजी अपनी तपस्या में लीन थे। कामदेव पार्वती की सहायता को आये। उन्होंने प्रेम बाण चलाया और भगवान शिव की तपस्या भंग हो गयी। शिवजी को बडा क्रोध आया और उन्होंने अपनी तीसरी आंख खोल दी। उनके क्रोध की ज्वाला में कामदेव का शरीर भस्म हो गया। फिर शिवजी ने पार्वती को देखा। पार्वती की आराधना सफल हुई और शिवजी ने उन्हें अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार कर लिया। होली की आग में वासनात्मक आकर्षण को प्रतीकत्मक रूप से जला कर सच्चे प्रेम की विजय का उत्सव मनाया जाता है।

होली का त्यौहार प्रह्लाद और होलिका की कथा से भी जुडा हुआ है। प्रह्लाद के पिता हिरण्यकश्यपु नास्तिक थे। वह चाहते थे कि उनका पुत्र भगवान नारायण की आराधना छोड दे। परन्तु प्रह्लाद इस बात के लिये तैयार नहीं था। हिरण्यकश्यपु ने अपनी बहन होलिका को प्रह्लाद के साथ आग में बैठने को कहा। होलिका को यह वरदान प्राप्त था कि वह आग में नहीं जलेगी। परन्तु होलिका का यह वरदान उस समय समाप्त हो गया जब उसने भगवान भक्त प्रह्लाद का वध करने का प्रयत्न किया। होलिका अग्नि में जल गई परन्तु नारायण की कृपा से प्रह्लाद का बाल भी बांका नहीं हुआ।

कुछ लोग इस उत्सव का सम्बन्ध भगवान कृष्ण से मानते हैं। राक्षसी पूतना एक सुन्दर स्त्री का रूप धारण कर बालक कृष्ण के पास गयी। वह उनको अपना जहरीला दूध पिला कर मारना चाहती थी। दूध के साथ साथ बालक कृष्ण ने उसके प्राण भी ले लिये। कहते हैं मृत्यु के पश्चात पूतना का शरीर लुप्त हो गया इसलिये ग्वालों ने उसका पुतला बना कर जला डाला। मथुरा तब से होली का प्रमुख केन्द्र है।

होली का त्योहार राधा और कृष्ण की पावन प्रेम कहानी से भी जुडा हुआ है। वसंत के सुंदर मौसम में एक दूसरे पर रंग डालना उनकी लीला का एक अंग माना गया है। वृन्दावन की होली राधा और कृष्ण के इसी रंग में डूबी हुई होती है।

The Sachin Tendulkar…

This was soo Unforgettable Moment, I can’t say How much excitement I had……..

Sachin Tendulkar became the first batsman to score a double century in one-day internationals on Wednesday.
Tendulkar, who opens the batting in ODIs, achieved the feat in the second one-dayer against South Africa, his 200 not out guiding the home team to 401-3 in 50 overs.
The 36-year-old former India captain holds the record for most runs in tests (13,447) and one-day internationals (17,598) and most centuries in tests (47) and ODIs (46).
Tendulkar reached 200 with a single off Charl Langeveldt in the final over of India’s innings on Wednesday, having earlier broken the world record for the highest individual score of 194 held by Pakistan’s Saeed Anwar and Zimbabwe’s Charles Coventry.
Tendulkar, who scored centuries in both tests against South Africa this month, reached 200 off just 147 balls with 25 fours and three sixes.
Tendulkar’s previous highest one-day individual score was 186 not out against New Zealand in Hyderabad in 1999.

Sachin Ramesh Tendulkar (born 24 April 1973) is an Indian cricketer. He holds several batting records, including the most Test centuries and the most one-day international centuries, and was rated in 2002 by Wisden as the second greatest Test batsman ever, after Sir Don Bradman. He received the Rajiv Gandhi Khel Ratna, India’s highest sporting honour, for 1997-1998, and the civilian award Padma Shri in 1999. Tendulkar was a Wisden Cricketer of the Year in 1997.

Sachin……Is the magician of cricket. He can do anything that he wants and I know that sachin never pay attention on those stupid comments came from other.The peoples who spokes against sachin,I think they are the foolish person in the world…..and they have no any knowledge of cricket. My advice to those people that as early as possible please leave the watching and playing of cricket because Sachin have finished only half life of international cricket.
I salute my respected person.
Sooooooo sachin go ahead and don’t see back, the Fans like me are always with you……………………

एक दोस्त चाहिए…


ना ज़मीन, ना सितारे, ना चाँद, ना रात चाहिए,
दिल मे मेरे, बसने वाला किसी दोस्त का प्यार चाहिए,

ना दुआ, ना खुदा, ना हाथों मे कोई तलवार चाहिए,
मुसीबत मे किसी एक प्यारे साथी का हाथों मे हाथ चाहिए,

कहूँ ना मै कुछ, समझ जाए वो सब कुछ,
दिल मे उस के, अपने लिए ऐसे जज़्बात चाहिए,

उस दोस्त के चोट लगने पर हम भी दो आँसू बहाने का हक़ रखें,
और हमारे उन आँसुओं को पोंछने वाला उसी का रूमाल चाहिए,

मैं तो तैयार हूँ हर तूफान को तैर कर पार करने के लिए,
बस साहिल पर इन्तज़ार करता हुआ एक सच्चा दिलदार चाहिए,

उलझ सी जाती है ज़िन्दगी की किश्ती दुनिया की बीच मँझदार मे,
इस भँवर से पार उतारने के लिए किसी के नाम की पतवार चाहिए,

अकेले कोई भी सफर काटना मुश्किल हो जाता है,
मुझे भी इस लम्बे रास्ते पर एक अदद हमसफर चाहिए,

यूँ तो ‘मित्र’ का तमग़ा अपने नाम के साथ लगा कर घूमता हूँ,
पर कोई, जो कहे सच्चे मन से अपना दोस्त, ऐसा एक दोस्त चाहिए……..

जब मैं छोटा था..!

जब मैं छोटा था,

शायद दुनिया बहुत बड़ी हुआ करती थी…

मुझे याद है मेरे घर से “स्कूल” तक का वो रास्ता,

क्या क्या नहीं था वहां,

छत के ठेले, जलेबी की दुकान, बर्फ के गोले, सब कुछ,

अब वहां “मोबाइल शॉप”, “विडियो पार्लर” हैं, फिर भी सब सूना है….

शायद अब दुनिया सिमट रही है……

जब मैं छोटा था,

शायद शामे बहुत लम्बी हुआ करती थी….

मैं हाथ में पतंग की डोर पकडे, घंटो उडा करता था,

वो लम्बी “साइकिल रेस”, वो बचपन के खेल,

वो हर शाम थक के चूर हो जाना,

अब शाम नहीं होती, दिन ढलता है और सीधे रात हो जाती है……….

शायद वक्त सिमट रहा है……..

जब मैं छोटा था,

शायद दोस्ती बहुत गहरी हुआ करती थी,

दिन भर वो हुज़ोम बनाकर खेलना,

वो दोस्तों के घर का खाना, वो लड़किया, वो साथ रोना,

अब भी मेरे कई दोस्त हैं, पर दोस्ती जाने कहाँ है,

जब भी “ट्रेफिक सिग्नल” पे मिलते हैं “हाई” करते हैं,

और अपने अपने रास्ते चल देते हैं,

शायद अब रिश्ते बदल रहें हैं……

जिन्दगी,रिश्ते,प्यार,किस्मत!

बहते अश्को की ज़ुबान नही होती,

लफ़्ज़ों मे मोहब्बत बयां नही होती,

मिले जो प्यार तो कदर करना,

किस्मत हर कीसी पर मेहरबां नही होती.

अपने दिल को पत्थर का बना कर रखना ,

हर चोट के निशान को सजा कर रखना ।

उड़ना हवा में खुल कर लेकिन ,

अपने कदमों को ज़मी से मिला कर रखना ।

छाव में माना सुकून मिलता है बहुत ,

फिर भी धूप में खुद को जला कर रखना ।

उम्रभर साथ तो रिश्ते नहीं रहते हैं ,

यादों में हर किसी को जिन्दा रखना ।

वक्त के साथ चलते-चलते , खो ना जाना ,

खुद को दुनिया से छिपा कर रखना ।

रातभर जाग कर रोना चाहो जो कभी ,

अपने चेहरे को दोस्तों से छिपा कर रखना ।

तुफानो को कब तक रोक सकोगे तुम ,

कश्ती और मांझी का पता याद रखना ।

हर कहीं जिन्दगी एक सी ही होती हैं ,

अपने ज़ख्मों को अपनो को बता कर रखना ।

मन्दिरो में ही मिलते हो भगवान जरुरी नहीं ,

हर किसी से रिश्ता बना कर रखना ………..

Is the world bad or Your window dirty?

One meeting with a Cute Girl ( I don’t wanna to publish her Name) and an hour long discussion that followed gave me quite some perspectives about my own behavior. The gist of the discussion was that while looking at the world outside and people around us, we tend to make hasty judgments.
Leadership has the personal aspect of looking from inside out. We should step back and ask ourselves why is that behavior so? Is it really the case that our ‘Window’ to the world is dirty itself rather than the world outside….

Is She the Girl for Me?

It all started during My Graduation. I met this girl through a close friend i used to College with. It all started as a big joke but turned out to be real. The girl was so shy, couldn’t think she’d make me happy, but she proved me wrong. She was the best thing that ever happened to me. She made my life so fun and real, through her i got to know what love is…
Things went so well with us but then, i got admission in another City and She also got a job, hence our love turned out to be long distance. I know what i feel for her is real and great, but am not sure ready to settle with her. I m 23 years old,nd i am not ready to settle down with her.I also think my dad won’t accept her, and am also not ready to be disappointed, should i take the risk or should i move on, and wait for fate to offer me something better? I love her sooo very much…..